हैदराबाद पुलिस मुठभेड़ से बेहतर होता, अदालत बलात्कारियों को रातोंरात सज़ा देती...

चारों बलात्कारियों के जिस्म में बारूद उतारा गया, बहुत अच्छा हुआ...इससे कहीं ज़्यादा बुरी मौत के वो हक़दार थे...


देश की जनता भी बहुत खुश है, की बलात्कारियों पर तालिबानी सज़ा का तरीका अपनाया गया...


काश, यही काम अदालत करती...रातों रात अदालत खुलती और बलात्कारियों को फांसी की सज़ा सुनाई जाती जैसे सरकारें रातोंरात राष्ट्रपति शासन लगाती और हटाती हैं, ये भी हो सकता था...


तक हमें और ज़्यादा खुशी भी होती और अपनी न्यायपालिका पर गर्व भी...लेकिन ऐसा नहीं हुआ, यही वजह है लोग सज़ा के गलत तरीके पर खुश हो रहे हैं...


हैदराबाद पुलिस मुठभेड़ हमारे देश की अदालतों को विकलांग साबित कर रही है...


क्या अब न्यायपालिका से भरोसा खत्म होने की शुरुआत हो चुकी है??


अगर हालात ऐसे ही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब अदालतों के बाहर फैसले होंगे और न्यायपालिका मूकदर्शक बनी होगी. इस तरह से जनता का भरोसा न्यायपालिका से उठ जाएगा, जो की गलत है...