राजनीतिक अस्थिरता के बीच महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन, अभी क्या हैं विकल्प?

अधिकाधिक 6 महीने के लिए किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लगाया जा सकता है. जिसके बाद चुनाव आयोग (Election Commission of India) को महाराष्ट्र (Maharashtra) में फिर से चुनावों की घोषणा करनी पड़ेगी.


नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) के राज्यपाल बीएस कोश्यारी (BS Koshyari) ने सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य में फिलहाल कोई भी राजनीतिक दल अपना बहुमत साबित नहीं कर सका है. जिसके बाद महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने राष्ट्रपति शासन (President's Rule) की मंजूरी दे दी है. बता दें कि राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को बहुमत साबित करने के लिए और समयसीमा बढ़ाने से मना कर दिया था. शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी से बातचीत के चलते और 48 घंटे का समय मांगा था.


विधानसभा चुनावों के नतीजों के 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सरकार गठन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है. बता दें विधानसभा के नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे. जिसके बाद कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछले शुक्रवार को देवेंद्र फड़णवीस (Devendra Fadnavis) ने दक्षिणी मुंबई के राजभवन जाकर राज्यपाल कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था.


एक दिन बाद, राज्यपाल ने बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटों वाला राजनीतिक दल होने के नाते नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था और इसके प्रति अपनी इच्छा और समर्थता दिखाने को कहा था. हालांकि बीजेपी ने रविवार को कहा था कि वह अभी सरकार नहीं बना सकती है. इसके साथ ही बीजेपी ने शिवसेना से कहा था कि अगर शिवसेना, विपक्षी दलों कांग्रेस (Congress) और एनसीपी (NCP) के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है तो उसे 'गुडलक'.


क्या है वर्तमान गणित?


भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने 25 अक्टूबर को एक नोटिफिकेशन भी प्रकाशित किया था, जिसमें नई चुनी गई विधानसभा के गठन की बात कही गई थी.


महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटे हैं. बीजेपी के पास इनमें से सबसे ज्यादा सीटें (105) हैं, लेकिन यह आधी सीटों (144) के आसपास भी नहीं है. वहीं शिवसेना के पास 56 सीटे हैं. NCP और कांग्रेस के पास क्रमश: 54 और 44 सीटे हैं. जबकि बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटी पार्टियों से बातचीत कर रही है फिर भी इसके पास बिना शिवसेना के समर्थन के बिना सरकार बनाने लायक सीटें नहीं हो सकेंगीं. और चूंकि शिवसेना की नजरें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं, वह भी बीजेपी के बिना सरकार नहीं बना सकती है, जबतक कि उसे कांग्रेस और NCP दोनों ही समर्थन देने के लिए तैयार न हो जाएं.


राष्ट्रपति शासन क्या है?


किसी भी राज्य में एक बार में अधिकतम 6 महीने के लिए ही राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लगाया जा सकता है. वहीं, किसी भी राज्य में अधिकतम तीन साल के लिए ही राष्ट्रपति शासन लगाने की व्यवस्था है. इसके लिए भी हर 6 महीने में दोनों सदनों से अनुमोदन जरूरी है.


राष्ट्रपति शासन (President's Rule) से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ जाता है. आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति (President) किसी भी राज्य (State) में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं. यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है. ऐसा जरूरी नहीं है कि वे राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही ऐसा करें. अनुच्छेद 365 के मुताबिक यदि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उस हालत में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के दो महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों से इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है.


बहुमत हुआ तो हट सकता है राष्ट्रपति शासन?


किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अगर कोई राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हासिल कर लेता है (बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में आ जाता है) तो राष्ट्रपति शासन (President's Rule) हटाया भी जा सकता है.


क्या पहले कभी लगा है राष्ट्रपति शासन?


राज्य में पहले भी दो बार राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लग चुका है. एक बार 17 फरवरी, 1980 से 8 जून, 1980 के बीच 112 दिनों के लिए, जब पवार के पास बहुमत होने के बावजूद सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था. और हाल में ही 28 सितंबर, 2014 से 31 अक्टूबर, 2014 तक जब कांग्रेस सरकार से सहयोगियों के समर्थन वापस लेने के चलते सरकार गिर गई थी.