अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट से आने वाला हर फैसला काशी को मंजूर है। गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी प्रेम और भाईचारा हमारी मिट्टी में समाया हुआ है। हमने बड़े बड़े जख्मों को सहा है लेकिन आपसी भाईचारा कभी बिगड़ने नहीं दिया। इस बार भी बिगड़ने नहीं देंगे। अदालत का फैसला न किसी की जीत होगी न हार। यह हमारे लिए होगा केवल एक समाधान, जिसे सारा मुल्क स्वीकारेगा और बिना जश्न या गम मनाए शांति, प्रेम और आपसी सदभाव की राह पर बढ़ता चला जाएगा। सभी धर्मों और वर्गों से जुटे लोगों ने एकजुटता बनाए रखने की अपील करने के साथ ही मिलजुलकर रहने का संकल्प भी लिया। डीएम कौशल राज शर्मा और एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने फैसले से पहले सतर्कता को लेकर चल रही तैयारियों से नहीं घबराने की अपील भी की। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह सतर्कता क्यों जरूरी है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक भारत माता मंदिर के प्रांगण में हुए आयोजन में सभी धर्मों के धर्मगुरु जुटे। धर्मगुरुओं के साथ शहर के व्यापारी संगठनों के तमाम लोग, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के मुखिया और मानिंद लोगों के साथ ही आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे। सबसे पहले सभी को 'हिन्दुस्तान' की ओर से लाल गुलाब दिए गए। सभी को शपथ पत्र की प्रतियां भी पहुंचाई गईं।
आयोजन की शुरुआत अन्नपूर्णां मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी ने की। उसके बाद विभिन्न लोगों ने अपनी बात रखी। प्रमुख रूप से पातालपुरी मठ के महंत स्वामी बालक दास, कबीर मठ मूलगादी के महंत विवेकदास, इमाम मौलाना हारुन रसीद नक्शबंदी, इमाम मौलाना हसीन अहमद हबीबी, नीचीबाग गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी भाई धर्मवीर सिंह, मैत्री भवन के निदेशक फादर चंद्रकांत, भदैनी जैन मंदिर के प्रमुख पुजारी सुरेंद्र जैन, जमियत उलमा के सचिव हाजी जावेद एकबाल, श्रीविद्या मठ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रतिनिधि चैतन्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि आरके चौधरी, मोहन लाल सरावगी, प्रेम मिश्रा, अजीत सिंह बग्गा आदि ने एक सुर से लोगों से एकजुटता बनाए रखने की अपील की।
यह ली शपथ
'मैं इस शहर का, हिन्दुस्तान का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह शपथ लेता हूं कि अयोध्या प्रकरण में जो भी फैसला आएगा, उसे सहर्ष स्वीकार करूंगा। फैसला चाहे जो भी हो, मैं न तो जश्न मनाऊंगा और न ही कोई प्रतिक्रिया करूंगा। मैं धर्म के नाम पर किसी बाहरी व्यक्ति को इस मुल्क की फिजां बिगाड़ने की कोशिश भी नहीं करने दूंगा। मैं शपथ लेता हूं कि अयोध्या प्रकरण में व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मैं किसी के पक्ष या विपक्ष में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। न ही धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर किसी भी पोस्ट को लाइक करूंगा और न ही इसे शेयर करूंगा। मुझे इस देश की न्यायपालिका पर भरोसा है। मुझे इस मुल्क पर गर्व है। कौमी एकता और सद्भाव बनाने के लिए मैं हर सम्भव कोशिश करूंगा। हिन्दुस्तान मेरा घर है। परिवार है। मैं इसके लिए पूरी तरह से समर्पित रहूंगा। ये मेरा प्रण है। यही मेरा धर्म है, यही मेरा ईमान है।'
हम लोगों को फैसले के बाद यहां इस तरह से माहौल बनाकर रखना है जिससे बनारस की गंगा जमुनी तहजीब की खुशबू भारत ही नहीं पूरी दुनिया में फैल जाए।
-महंत रामेश्वरपुरी, अन्नपूर्णा मंदिर
आज समय आ गया है जब काशी पूरी दुनिया को दिखा सकती है कि गंगा जमुनी तहजीब क्या होती है। हमें शांति बनाए रखते हुए फैसले का स्वागत करना है।
-महंत स्वामी बालक दास, पातालपुरी मठ
काशी हमेशा शांति और भाइचारे का संदेश देता रहा है। आगे भी हम इसी तरह भाइचारा बनाए रखेंगे।
-फादर चंद्रकांत, निदेशक, मैत्री भवन
हम एक थे, एक हैं, एक साथ रहेंगे। फैसला कोई भी आए हमें कोई अलग नहीं कर सकता है। वाहे गुरु का खालसा वाहे गुरु की फतह।
-मुख्य ग्रंथी भाई धर्मवीर सिंह, गुरुद्वारा नीचीबाग
हमारे समाज में भारी तादात में जिम्मेदार लोग है, जो समय समय पर मार्गदर्शन करते रहते हैं। हमारे यहां कहा गया है कि परोपकार ही पुण्य है। न्यायालय का हर फैसला हम मानेंगे।
-चैतन्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, श्रीविद्या मठ
काशी हमेशा समरसता की नगरी है। हम लोग हमेशा सद्भाव के लिए जाने जाते हैं। आगे जो भी फैसला आएगा हम सद्भाव के साथ ही रहेंगे।
-महंत विवेकदास, कबीरमठ मूलगादी
अब तलक जो भी हुआ उसे भूला देना है। नफरतें दिल से हमें अपनी मिटा देना है। आ मेरे यार एक बार गले से लग जा। फिर देखेंगे क्या लेना है, क्या देना है। सियासत की बातें सियासत वाले जानें। हमारा पैगाम है मोहब्बत, जहां तक पहुंचे।
-अतीक अहमद, सामाजिक कार्यकर्ता
जहां से अन्य धर्म की अहिंसा की बातें खत्म होती है वहां से जैन धर्म की अहिंसा की परिभाषा शुरू होती है। हमें अमन चैन का महौल बनाए रखना है।
सुरेंद्र जैन, भदैनी जैन मंदिर के प्रमुख पुजारी